अकोला- महाराष्ट्र निकाय चुनावों के नतीजों के बाद अब सबकी नजरें ‘महापौर की कुर्सी’ पर टिकी हैं। राज्य के शहरी विकास विभाग ने 29 नगर निगमों के लिए आरक्षण का ड्रा निकालने की तारीख घोषित कर दी है। इस प्रक्रिया से राज्य की सियासत में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।
महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया अब अपने अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। 15 जनवरी को हुए मतदान और 16 जनवरी की मतगणना के बाद, अब 22 जनवरी का दिन राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम होने वाला है। सुबह 11 बजे मुंबई स्थित मंत्रालय के परिषद भवन (छठी मंजिल) में राज्य मंत्री (शहरी विकास) की अध्यक्षता में एक आधिकारिक लॉटरी निकाली जाएगी। इस प्रक्रिया के माध्यम से यह स्पष्ट होगा कि 29 नगर निगमों में से कौन सी सीट अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी या महिलाओं के लिए आरक्षित होगी।
आरक्षण के नियमों में बड़े बदलाव के संकेत
इस बार महापौर पद के लिए आरक्षण की रोटेशन (चक्रीय) प्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण चर्चाएं गर्म हैं। सूत्रों के अनुसार, शहरी विकास विभाग नियमों में संशोधन कर रोटेशन को नए सिरे से शुरू कर सकता है कानून के अनुसार, समाज के हर वर्ग (SC, ST, OBC और महिला) को सत्ता में समान प्रतिनिधित्व देने के लिए महापौर पद का आरक्षण चक्रीय पद्धति से तय किया जाता है। यदि प्रक्रिया को ‘री-सेट’ किया गया, तो कई समीकरण बदल सकते हैं।
निकाय चुनावों में भाजपा का दबदबा बरकरार
चुनाव नतीजों के विश्लेषण से साफ है कि महाराष्ट्र की जनता ने एक बार फिर भाजपा पर भरोसा जताया है। पार्टी ने मुंबई सहित राज्य की 19 नगरपालिकाओं में अपनी पकड़ मजबूत रखी है। विशेष रूप से:
पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़: यहाँ भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर अजित पवार के नेतृत्व वाली प्रतिद्वंद्वी ताकतों को तगड़ी शिकस्त दी है।
नागपुर: संतरों की नगरी में भाजपा का किला अभेद्य रहा।
छत्रपति संभाजीनगर: यहां ठाकरे गुट ने अपनी पकड़ को और अधिक मजबूती प्रदान की है।
अब सबकी नजरें 22 जनवरी की लॉटरी पर हैं, क्योंकि आरक्षण का स्वरूप ही तय करेगा कि आगामी कार्यकाल में इन शहरों की कमान किसके हाथ में होगी।




